Monday 31 May 2010

महाभारत में मैं ही जला

अपने महाभारत में मैं ही जला
मैं ही लड़ा
मुझे कोई कृष्ण ना मिला
ना कोई बल था
ना कोई छल था
निपट अकेला, निहत्था
ना मैंने किसी से राज मांगा था
ना मेरे पास था मैं
फिर भी युद्ध में था
ना मुझे गीता मिली ना सारथी
ना धर्म था ना अधर्म था
ना वो जय थी ना पराक्रम था
ना युद्ध के नियम थे, ना कोई जयघोष था
मैं चलता, मैं जलता
मैं रूकता, मैं मरता

2 comments:

दिलीप said...

waah man ki vedna bahi hai is rachna me

माधव said...

nice