Monday, March 26, 2012

रास्ते का आंखों देखा हाल

शब्द खोजना, काफी मुश्किल काम है,
कायदे से कुछ नहीं मिलता।
अंधेरों में भी जुगनू दिख जाते है
मर्यादा तोडते हुए
रोशनी में चेहरों पर दिखता है अंधेरा।
अजब सा घालमेल हो गया
हंसने की कोशिश में रोते हुए लोग
भद्दे दिखने लगते है बेहद खूबसूरत चेहरे पास आते ही
दूर से हाथ देकर ग्राहक रोकता वो काला दागदार चेहरा
खूबसूरत हो जाता है अचानक
ताकतवर दिखते इंसान
कमजोरियों की परतों में गिड़गिड़ाते हुए
रोटियां को तडपने वाले
वक्त पर गुर्रा रहे है
एकांत में खिले चेहरे
भीड़ में अजनबी में बदल रहे है
बात सिर्फ शब्द खोजने की है
मैं रिश्ते में कहा घुस जाता हूं
अभी जिसे मैंने कहा था नेता
वो टके का चोर निकला
नशे में चूर आदमी के
हाथ से गिरे रूपये को लेकर झूम रही है बुढिया
बुझी उम्र के साथ
गरजती आवाज नारे लगा रही है
भीड़ आईसक्रीम का रेट पूछ रही है
झूठ का ठेका लिए
सच की सीढ़ी पर चढें चेहरे
ना सच बोल रहे है ना झूठ
बस डर से भीगे शब्दों में
रोटियां तोल रहे है
मैं खोज रहा हूं शब्द
सही शब्द
बता सकूं
रास्ते का आंखों देखा हाल।

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